![]() |
| RAVI SHANKAR |
जन्म के कई मिनटों के बाद अचानक मैं रोने लगा था (ये मुझे याद नही माँ ने बताया ) कई मिनटों तक चुप नही हुआ था , तब मेरी माँ को कुछ शक हुआ और वो रोने का कारण जान गयी , उसी वक़्त एक बहुत ही छोटा opration हुआ था , बिना मुझे बेहोश किये , क्यूँ की अभी जन्म का एक घंटा भी पूरा नही हुआ था / मुझे याद तो नही के उस नवजात को कितना दर्द हुआ होगा , मगर शायद इसी वजह से मेरे में बर्दाश्त करने की क्षमता का विकास हुआ /
जब कुछ महीनो का हुआ तो अक्सर बीमार पड़ने लगा , ये सिलसिला तब तक चला जब तक इतना बड़ा न हो गया के मुझे Injection दिया जा सके , मैं 3 वर्ष का हो गया था / एक बड़े ही प्रसिद्द डॉक्टर ने दवा लिखी , २ Injection सुबह और २ injection शाम / मुझे याद है , जब पापा मुझे injection दिलवा के लाते थे , साइकिल की अगली सीट पर बैठा नही जाता था , करवटें बदल कर बैठा करता था / रूह कांपती थी सुबह शाम , मैं भी रोता था और माँ भी / ये दर्दनाक सिलसिला तब तक चला जब तक एक और डॉक्टर से मुझे इसी शर्त पर दिखाया गया के वो मुझे Injection नहीं देंगें/ सच तो ये है के injection पड़ते पड़ते मेरे कूल्हों पे निशान पर चुके थे , जो अब तक नहीं मिटे , ये दर्द लेने और सहने के ट्रेनिंग भगवान ने बचपन से ही देनी शुरू कर दी थी /
मैं बचपन में ज्यादा शरारती तो नहीं था मगर दीदी बताती है के जब वो गोद में लेके मुझे घुमती थी , मैं उसकी पीठ पे चुटकी काट काट के बेहाल कर देता था /
अब मैं थोड़ा और बड़ा हो रहा था , और चीजों को बड़ी जल्दी समझने लगा था , उसी उम्र में सब कुछ जानने की इक्षा बलवती थी / सूर्य , चन्द्रमा , प्रधान मंत्री , अमिताभ bachhan , क्रिकेट , फिल्म सब कुछ /
बचपन कुछ घटनाएँ मेरे जीवन में बहुत ही महत्व रखती हैं / उस वक़्त देश की प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी थीं / मैंने पिता जी से सवाल किया "वो क्या खाती होगी " पापा ने जवाब दिया "यही रोटी चावल दाल और काजू किशमिश " मैंने सोंचा अगर हमारी तरह ही खाती है तो वो प्रधान मंत्री क्यों हैं ? मैंने फिर पूछा " और सोती कहाँ है " पापा ने हँसते हुए कहा "चाँदी के पलंग पे और नोटों के बिस्तर पे " (शायद वो मेरे मनोभाव समझ गये थे )...मुझे अब लगा हाँ , ये कुछ हुई प्रधान मंत्री वाली बात , मैंने फिर पूछा , "नोटों के बिस्तर पे कैसे सोती है " पापा ने कहा रुक बताता हूँ / इसके बाद पिता जी ने 1 , 2 , 5 , 10 और 20 की गड्डियों को जो वो अपने बक्से में रखा करते थे , एक बिस्तर सा बना दिया , उसपर एक पतली चादर बिछा दी और मुझे सुला दिया / मुझे अब तक उन नए नोटों की खुशबु याद है / क्या दिन थे वो भी /
एक और विचित्र घटना उसी समय की है , नवरात्री का समय था / पिता जी , कलश स्थापना करते थे उन्होंने दीदी को बाहर की पान दुकान , जो घर से करीब 150 मीटर की दुरी पे था , से पान लाने को कहा (पूजन के लिए ) दीदी ने मेरे हाथ पकड़ा और चल दी / वो पान दुकान एक मील के पत्थर(जो अक्सर सड़क के किनारे दूरी बताने के किये गाड़े जाते हैं ) के ऊपर था / जब हम पान दुकान के पास पहुंचे तो अचानक ही शोर मचने लगा, चरों तरफ भागम भाग होने लगी, एक हाथी पागल हो गया था , और वहां के आस पास के दुकानों को तोड़ रहा था , अफरा तफरी में डर के मारे दीदी ने मेरा हाथ छोड़ दिया और घर के तरफ दौड़ लगाने लगी / मैं अकेला पड़ गया लेकिन दिमाग ने साथ नही छोड़ा / मैं उस पान दुकान के निचे घुस गया , और अपने आप को उस मील के पत्थर के पीछे छिपाने की कोशिश करने लगा / झांक झांक कर लोगो को भागते हुए और हाथी को गरजते हुए देख रहा था / थोड़ी देर बाद सब शांत हुआ और पापा ने मुझे दुकान के निचे पा कर चैन की साँस ली / दीदी को उस दिन बहुत डांट मिली , और मुझे माँ का असीम लाड -प्यार और आलू के पराठे , धनिया की चटनी , जो मेरा सबसे प्रिय आहार था /
एक छोटी सी और घटना है उसी पान वाली दुकान की . पिता जी को पान खाने का शौक था /पिता जी देवी की आराधना करते थे और मस्तक पे रोज़ काला तिलक लगा दिया करते थे /एक बार उस पान वाले ने मुझसे पूछा "ये काला तिलक क्यूँ लगाते हो , खतरे की निशानी है " मेरे जवाब था " इसलिए तो लगता हूँ " वो मुझे देखता रह गया , उस वक़्त मेरी उम्र 5 साल थी / मुझे बाद में अहसास हुआ के ,मेरे में वाक पटुता आती जा रही है /
मैं स्कूल जाने लगा था , अच्छा स्टुडेंट था / Teachers बहुत प्यार करते थे मुझे / मेरी handwritting और मेरी सहनशीलता , संस्कार जो सिखाये जाते , उसपे मेरा response सब को अच्छा लगता था / मैं हमेशा फर्स्ट आता था / 5th क्लास तक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ा ....3rd से ही मुझसे प्रभावित हो के , स्कूल वाले मुझसे question पेपर (handwritting की वजह से ) टाइप कराते थे स्टेंसिल पर , सब मेरी प्रतिभा के कायल थे / मैं एक अच्छा singer , डांसर और GK का मास्टर था , अपनी उम्र के हिसाब से / 5 Th क्लास में कुछ लड़कियां भी थी , जो हमेशा देख के आपस में काना फूसी करती थी , लेकिन मेरे समझ में नही आता था , वो क्या बात करती हैं ? मुझे देख के इतना हँसती क्यों हैं ? एक ने तो मुझे दशहरा घुमने के लिए 10 rs भी दिया था , मैंने काफी मना किया वो नही मानी, कसम दे दी , पहली बार ऐसा लगा के मैं अनिल कपूर हूँ और वो माधुरी दीक्षित / मैंने कई सालों तक वो 10 का नोट रखा / बाद में wallet भी खो गया और वो नोट भी /
मेरे पिता नौकरी में बड़े ईमानदार थे / उनके केबिन के आगे जो स्टूल लगा ले चपरासी बैठा करता था , उसका आज इस शहर में , बंगला गाड़ी सब कुछ है , क्यों की वो हर काम बिना पैसे लिए नहीं करता था /
उनकी ईमानदारी का एक छोटा उदाहरण है , उनके संस्था में cement की बिक्री हुआ करती थी / ऑफिस पहले तल्ले पे हुआ करता था / एक बार cement की कालाबाजारी हो रही थी /लोग एक एक बैग पे 5 rs (उस ज़माने में ) ले रहे थे और पैसे कम रहे थे / लेकिन पिता जी तो ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे / एक बार एक सरदार जी जो पिता से बहुत प्रभावित थे बोले " झा जी सभी पैसे कमा रहे हैं , अपने अभी तक कुछ नही किया , आपने कष्ट से जीवन काटा है , अपने लिए नहीं अपने बच्चो के लिए सोंचिये और एक बैग पे एक रुपया लीजिये , सब से पहले मैं दूंगा " मेरे पिता का जवाब था , "सरदार जी, आज के बाद से मुझे बेईमानी सिखाई , ऑफिस के नीचे फेक दूंगा "/ मैं अपने पिता के इस जज्बे को सलाम करता हूँ / उनकी ये ईमानदारी और वसूल अभी तक कायम है /
इसी बीच मेरे पिता जी ने अपनी जॉब छोड़ दी और अपना बिज़नस स्टार्ट किया / काफी सफलता मिली / पैसे भी कमाए और अपने जीने के तरीके को भी काफी आधुनिक कर दिया / मेरे पिता एक खर्चीले आदमी हैं / पैसा है तो खर्च करो , उन्होंने अपने पूरे जीवन में कोई भी LIC या ऐसी कोई चीज़ आज तक नहीं करवाई /
सबसे बड़ी घटना जिसने मेरे पूरे जीवन पे प्रभाव डाला वो था , इंदिरा गाँधी का क़त्ल होना / वो एक ऐसी घटना थी जिसने न केवल मेरे पे , मेरे पिता के बिज़नस , मुझपे , पूरे देश पे प्रभाव डाला था / चारों तरफ आग ही आग , लोगों का मरना , लुट खसोट ...../मैंने देखा के एक घर के सारे लोगों पे तेजाब फेक दिया गया / एक बच्चे के लिए बड़ा ही बुरा अनुभव था / मैंने पहली बार curfew देखा / चारों तरफ सन्नाटा और पुलिस वाले , आर्मी /
एक और चीज़ देखि इत्ती देर वो था television / पहले तो केवल सिबाका गीत माला और छाया गीत सुना करता था / जब TV आया तो friday को चित्रहार देखने लगा / लेकिन पहली बार इंदिरा गाँधी का पूरा अंतिम संस्कार इत्ती देर तक टीवी पर देखा /
इस घटना के बड़े दूरगामी प्रभाव पड़े / देश पे भी , मेरी फॅमिली पे भी , मेरे ऊपर भी / ये बात 1984 की थी लेकिन इस घटना का प्रभाव अब तक मेरे जीवन में है /
जालिम सिंह अब 5 वर्ष का हो चुका था /

awesome writing bhaiya plz keep writing
जवाब देंहटाएं